Sunday, 30 June 2013

निकले तेरी गलियों से जनाजा मेरा बारात की तरह,
तू भी डाल दे कफ़न मुझ पर खैरात की तरह,
ना चाह मुझको कोई बात नहीं,आना पर मय्यत में मेरी,
सकूँ दे जो 'रूह को रिमझिम बरसात की फुहार तरह।
----------------------------------------------कमला सिंह 

Thursday, 27 June 2013

बेपनाह मुहब्बत है उस शख्स से मुझे, 
लेकिन उसने मुझे कभी ढूंढा ही नहीं ,
कहनी थी दिल की कैफियत उससे, 
पर उसने मुझे कभी समझा ही नहीं।।
------------------------------कमला सिंह 
bepanah hai muhbbat hai us shakhs se mujhe 
lekin usne mujhe kabhi dhundha hi nahi 
kehni thi dil ki kaifiyat usse 
par usne mujhe kabhi samjha hi nahi 
-------------------------------kamla singh 
एक ख्वाब है तमन्ना पाने की, 
एक राह है तमन्ना जाने की, 
एक आह है तमन्ना ना मिल पाने की, 
एक सैलाब है तमन्ना डूब जाने की।
---------------------------कमला सिंह
ना तुम आओगे,ना बहार आएगी 
न चाहत होगी, ना ख्वाब आयेंगे 
ना बातें होंगीं, ना याद आएगी 
ना जिंदगी होगी और ना मौत आएगी।
--------------------------कमला सिंह 

naa tum aaoge naa bahar aayegi 
na chahat hogi na khwab aayenge 
naa baaten hongi na yaad aayegi 
na zindgi hogi na maut aayegi 
-----------------------------------kamla singh
मुद्दतो से था मुझे इंतजार जिसका,काश वो खुदाई मिल जाये
जुस्तजू तो ये भी है ऐ खुदा,मेरी जिंदगी को रिहाई मिल जाये।
-----------------------------------------------कमला सिंह
अजीब सी बात है,वो दिल भी लगाते हैं और जान भी जाती है उनकी, 
कमाल दिल का हाल है उनका,ख्वाब भी देखें और ज़माने को पता भी ना चले .....
----------------------------------------------------------------कमला सिंह
मखलुख के निगाहों का कहना ही क्या 
वफ़ा की बात करते हैं, 
जरा उनके दिल में झांक ऐ"कमल"
उनके ज़ज्बात क्या कहते हैं। 
---------------------------------कमला सिंह
कभी जिंदगी ने पुकारा मुझे,कभी मैंने आवाज़ दिया जिंदगी को 
पुकारते रहे हम दोनों एक दूजे को पर,वक़्त ने बुला लिया हमको।।
------------------------------------------------------------कमला सिंह   

Wednesday, 26 June 2013

एक ख्वाब है तमन्ना पाने की, 
एक राह है तमन्ना जाने की, 
एक आह है तमन्ना ना मिल पाने की, 
एक सैलाब है तमन्ना डूब जाने की।
---------------------------कमला सिंह 

ek khwab hai tamnna pane ki 
ek rah hai tamnaa jane ki ,
ek aah hai tamnna na mil pane ki 
ek sailab hai tamnna dub jane ki ..
------------------------------kamla singh 

Tuesday, 25 June 2013

मानसिकता

लहू से लिपटी जिंदगियां 
हर वक़्त चीत्कार करती हैं। 

चिथड़ों से उकेरतीं कलियाँ 
खिलने से इनकार करती हैं।

मांस के लोथड़े से बना ये जिस्म 
मानसिकता को शर्मसार करती हैं।

रसातल में समाती ये इंसानियत 
सिसक-सिसक इज़हार सरेआम करती हैं।
--------------------------------------कमला सिंह  

तरुनी

तरुनी की तरुनाई सी,शीतल हूँ पुरवाई सी 
बिखर जाती हूँ मैं अधरों पे फूलों सी कुम्हलाई सी।

सौ चुप्पी के बाद एक आलसी अंगडाई सी 
मदमाती लेकिन अपने ही धुन में इठलाई सी।

रंग-बिरंगी तितलियों की मानिंद उडती हूँ लहराई सी 
खो जाती हूँ तरुनी की भांति राधा कृष्ण कन्हाई सी।
------------------------------------------------कमला सिंह 

Monday, 24 June 2013

तब्दीलियाँ बहुत की खुद में बदलने की,
कोशिश भी बेशुमार  किया,
भूलना तुझे मुनासिब ना समझा दिल ने ,
जिंदगी ने भूलने से भी इनकार किया।।
.................................कमला सिंह
 .
 tabdiliyaa bahut ki khud ko badlne ki 
koshish bhi beshumaar kiya,
bhulnaa tujhe munasib na samjha dil ne 
zindgi ne bhi bhulne se inkaar kiya 
------------------------------------kamla singh 
जब तू रखता है सीने पे मेरे सर अपना, 
विकल हो उठता है ममतामयी मन अपना, 
देखती हूँ भोली-भाली सूरत और प्यारे दो नैना, 
झूम उठता है मेरा ख़ुशी से दिल अंगना।
------------------------------------कमला सिंह 
jab tu rakhta hai seene pe mere sir apna 
vikal ho uthta hai mamtamayi man apna
dekhti hun bholi-bhali surat aur pyare do naina 
jhum uthta hai mera khushi se dil angna .
---------------------------------------kamla singh  

Sunday, 23 June 2013

सुकून

निकल गए जख्म दिलों के 
रुख हवाओं का बदल गया। 

तूने मरहम जो लगाया इश्क का 
इबादत में तेरे सर मेरा झुक गया।

कामयाबी नसीब हो तुझे इश्क की 
मेरा दिल जो अब तेरा हो गया।

दावत दे उन शिकस्ता रूहों को भी 
देखकर हमें"उन्हें" भी सुकून आ गया।
-----------------------कमला सिंह 

khazana

बीते यादों के कतरों को 
सन्दुक में सजाया था मैंने 
नाजों से पाला था जिस पल को 
खुशियों से सजाया था मैंने।

जाने कब टुटा वो ख्वाब मेरा 
जाने कब रूठा वो रब मेरा 
बस आस में उनकी जीती हूँ 
दिल के पेबंद को सिलती हूँ।

यु तों लाखों होंगे धनवान यहाँ 
पर मुझ जैसा कोई कहाँ 
बेशकीमती पलों के खजाने हैं 
जो तकदीर ने बांटें है।
---------------------कमला सिंह 
रिश्तों के टूटने के निशां मिटते नहीं जिंदगी में,
समंदर नहीं,जो पानी की लहरों से रेत पे बने निशां को भी,
अपने संग बहा ले जाये ..... कमला सिंह  

अभिमान इतना भी क्या की रिश्तों की डोर टूट जाये
 
ऐसा भी रिश्ता क्या जो दंभ में ज़ज्बात को निगल जाये।

-----------------------------------------------कमला सिंह

Saturday, 22 June 2013

मतलब

आरज़ू है किसी को जिस्म की 
चाहत है किसी को दिल्लगी की 
पर है ना कोई शख्स ऐसा जिंदगी में 
जो सो सोचे किसी की के मन की। 

लगे हैं सभी अपनी ख्वाहिश बताने में 
सोचा नहीं गुजरती है क्या आशियाने में 
मतलब का फलसफा है ज़माने का 
भरोसे का खून होता है नजदीकियां बढ़ाने में।
---------------------------कमला सिंह  
 

दर्द

तेरे प्यार ने दर्द की मल्लिका बना दिया 
तू भी तो आ के देख तूने क्या सिला दिया ,

सम्राज्या है सारा आस-पास खुशिओं में डूबा 
दुखों के खजाने से तूने मुझको सजा दिया।

क्या कहूँ तुझे मैं कि राज्य सूना है तुम बिन 
मरती हूँ मैं भी हर पल घुट-घुट के तुझ बिन।

संभाले नहीं संभलता ये दुखों का ताज 
बाँट लो मुझसे सबके दिलों का राज़।

पा जाऊं मैं मुक्ति तुम्हारे हांथों से ,
निजात मिले दुःख-दर्द और ज़ज्बातों से।

----------------------कमला सिंह 

Friday, 21 June 2013

इंतजार

उसने कहा इंतज़ार करो 
मैंने कहा आदत मेरी।

उसने कहा भुला ना करो 
मैंने कहा चाहत हो मेरी।

उसने कहा पास आओ मेरे 
मैंने कहा हसरत मेरी। 

उसने कहा तुम रूह हो मेरी 
मैंने कहा वजूद हूँ तेरी। 

उसने कहा जिंदगी हो मेरी 
मैंने कहा धडकनें हूँ तेरी। 

उसने कहा पास जिंदगी में आऊ कभी 
मैंने कहा मंजिल हो मेरी।

मैंने कहा हुआ बहुत सवाल अब आजो 
छुड़ाकर हाथ मेरा कहा उसने भूल जाओ 
--------------------कमला सिंह  
 



चीथड़े जिस्म के कपड़े पर 
पेबंद लगातें हैं जख्मों का 
धागा होता है हसरतों का 
सिलतें है उल्फत के रस्मों से।
......................कमला सिंह 

chithde jism ke kapde par 
peband lagaate hai jkhamon ke 
dhaga hota hai hasrton ka 
silten hai ulfat ke rasmon se .

-------------------------kamla singh 

Thursday, 20 June 2013

यादें

यादें तो बस यादें हैं 
भूली बिसरी बातें हैं 
जिंदगी के कुछ वादें हैं 
जो किस्मत ने बांटे हैं। 

पन्ना जो पलटा यादों का 
मंजर ही था चाहे खवाबों का 
दब गए वक़्त के पासों में 
कुछ जीते रहे मेरी सांसों में।

जो भी था बड़ा ही प्यारा था 
चाहे वो ख्वाब ही सारा था 
जीतें है हम बीतें यादों में 
शामों-सहर वो हमारा था।

यादें तो  बस यादें हैं 
भूली बिसरी बातें हैं।।।

--------------------कमला सिंह 


yaden tho bas yaden hain
bhuli bisri baaten hain 
zindgi ke kuch vaden hai 
jo kismat ne baaten hai .

panna jo pltaa yadon ka 
manjar hi tha chahe khwabon kaa
dab gaye waqt ke pason me 
kuch jite rahe meri sanson me 

jo bhi tha bada hi pyara tha 
chahe vo khwab hi sara tha 
jite hai hum bite yadon me 
shamon sahar vo humara tha 

yaden tho bas yaden hai 
bhuli bisri baten hai 
-------------------------kamla singh 
तस्सवुर में मेरे बसता था जो शख्स 
ख्यालों में नज़र आता है उसका ही अक्स 
तमाम कोशिशों के बाद भी निकला नहि वो रूह से 
जुड़ गया है वो मेरे ही लहू और मेरे वजूद से।
----------------------------------------कमला सिंह 

प्रकृति का पैगाम

आज प्रकृति की तबाही का मंजर है कुछ इस तरह   
त्राहि त्राहि मची है चहूँ दिशाओं में जिस तरह। 

कही जलधिराज का उफान है तो, 
कही हवाओं का विफरता तूफ़ान है,
कहीं धरती का कांपता (भूकंप) क्रोध है, 
तो कही ज्वालामुखी का फूटता चट्टान है। 

प्रकृति निरंतर दे रही है हमें ये पैगाम है 
ना छेड़ हद से ज्यादा,हम तेरे लिए वरदान हैं ।
--------------------------------कमला सिंह 
आजुर्दा दिल की उन्सियत बढ गयी इस कदर 
भूल बैठी मैं हद्देजुनुन इश्क में शामों सहर ....
---------------------------------------कमला सिंह 

aajurdaa dil ki unsiyat bad gayi is kadar 
bhul baithi main haddejunune ishq me shamon sahar ...
---------------------------------------kamla singh 

Wednesday, 19 June 2013

प्यार का इकरार नामा

आज मैं दिल से ये इकरार करती हूँ  
तेरी चाहतों को स्वीकार करती हूँ।

तमाम उम्र रहूंगी साथ तेरे 
ये बात भी मैं अंगीकार करती हूँ। 

रखना दिल में संजो कर मुझे
तेरा हर सपना साकार करती हूँ। 

वादा है मेरा आज ये तुझसे 
प्यार है तुझसे ये ऐलान  करती  हूँ।
.....................कमला सिंह  
हमारी दोस्ती पर बरसता रहे नूर खुदा का ,
बना रहे ये रिश्ता हमारा तमाम उम्र जिंदगी का।
.......................................कमला सिंह  
वक़्त सीखा देता है इंसान को फलसफा जिंदगी का 
फिर तो नसीब क्या,लकीर क्या,और तकदीर क्या।
.........................................कमला सिंह  

Tuesday, 18 June 2013

खरीददार

खरीददार तो बहुत थे जिंदगी के, 
बोली भी लगायी मैंने" अपनी" 
कोई शक्स ऐसा ना आया बढकर,
खरीद लेता जो अपनी मुस्कराहट देकर।

रुतबा एक से बढकर एक था उनका 
औकात और ईमान भी पैसा था ,
समझा ना किसी ने ज़ज्बात की कीमत,
परेशां रहे सभी,उनकी थी"अपनी"ही जद्दोजहद ।

देखती रही खरीदार मैं अपनी,
भाया न कोई दिल को मेरे,
दौलत वाले थे लाखों वहाँ पर,
ना था दिल का मालिक उनमें।

कोई शख्स ऐसा न आया बढकर,
खरीद लेता जो मुझे अपनी मुस्कराहट देकर।।
...............................कमला सिंह  
एक आँसू भी बद-दुआ देता है गरीब का
हजार दौलत भी भी लूटा दो तो क्या,
एक दुआ ही काफी है उन गरीबों का 
हज़ार तीर्थ में चढ़ा दो तो क्या ..
.........................कमला सिंह 

ek aansu bhi bad-dua dta hai garib ka 
hazar daulat luta do tho kya ,
ek dua hi kafi hai un garibon ka ,
hazar tirth me chada do tho kya ...
..............................kamla singh 

Monday, 17 June 2013

अर्थी

अर्थियां सजती हैं नित नए ,प्यार से सजे हर ख्वाबों का,
फूलों से लदे अरमानों का,आरज़ू का, दिल के फसानों का ,,

कान्धा भी देते है रूहों को ,उनके बिखरते ज़ज्बातों को, 
सिसकते आहों को ,मिटते राहों को।

फिर होता है तमाम आखिर" एक किस्सा "एक ज़माने का 
बीते फ़साने का ,दर्द में डूबे मयखाने का ,उजड़े आशियाने का 

सोचो कुछ कर गुजरने से पहले जिंदगी के मायने का 
फिर जो चाहो करो आबाद या बर्बाद अपने जिंदगानी का।
....................................................कमला सिंह .

रोटी

पेट की आग में जलती है दुनिया, 
एक रोटी के लिए भी मरती है दुनिया. 

दौलत (रोटी)ये अनमोल है, 
इसका ना कोई मोल है. 

रंग ये क्या क्या दिखती है, 
मौत को भी गले लगाती है. 

इस रोटी का कोई जोड़ नहीं,
जीवन में इसका कोई तोड़ नहीं.. 
.......................कमला सिंह 

pet ki aag me jalti hai duniya 
ek roti ke liye bhi marti hai duniya 

daulat (roti) ye anmol hai 
iska na koi mol hai 

rang ye kya kya dikhti hai
maut ko bhi gale lagati hai 

is roti ka koi jod nahi 
jivan me iska tod nahi 
............................kamla singh 

Sunday, 16 June 2013

गैरत बेच डाली है ठेकेदारों ने समाज के 
सजा मिलती है मासूम बेगुनाहों को ,
जुल्म होता है उनके ही हाथों से 
इलज़ाम लगता है वफादारों पे।
..............................कमला सिंह 
 gairat bech dali hai thekedaron ne samaj ke 
saza milti hai masum begunahon ko  
julm hota hai unke hi hathon se 
ilzaam lagta hai wafadaron pe .
.................................kamla singh 

Saturday, 15 June 2013

तूफ़ान ए इश्क

आज ज़ज्बातों का तूफ़ान सा उठा है (कमल)
चल रहे है खंजर,चलना संभल संभल,
आजमाईश है तेरी जिंदगानी-ए -किताब की
फैसला है तकदीर का और तू भी है अटल 

इम्तिहाने इश्क का है फैसला,गुजर रहा भारी हर पल 
मुमकिन नहीं है लौटना फितरत भी ना तू बदल, 
मुकम्मल होता नहीं आज जहान में कोई इश्क के   
फिर क्यों है तेरे दिल में ये खामोश सी हलचल।।
.......................................कमला सिंह (कमल )
  

Friday, 14 June 2013

badal

बरसते बादलों ने चूम कर धरती को प्यार का दिलकश पयाम भेजा है 
शीतल हवाओं,उफनती फजाओं ने हर दिल को सलाम भेजा है।
..........................................................कमला सिंह (कमल ) 

barsate badlon ne chum kart dharti ho dilkash pyaam bheja hai
shital hawaaon,ufanti fizaaon ne har dil ko salaam bheja hai ..
.............................................................kamla singh (kamal ) 

Thursday, 13 June 2013

kohinoor

लरजती सांसें, महकती खुशबु, फज़ाए भी रंगीन हैं 
सगोशियाँ तेरे प्यार की मेरी जिंदगी" महजबींन" हैं .

बरसते रहना खुदा के नूर की मानिंद जिंदगी में मेरे 
दौलत मेरी रुतबा मेरा,तू ही अल्लाह की नवाजी "कोहिनूर" है।
........................................कमला सिंह (कमल )

larjti sanse meri mehkati khushbu fajaye bhi rangeen hai 
sagoshiyaan tere pyar ki meri zindgi mehjabin hai 

barste rehna khuda ke noor ki manind zindgi me mere 
daulat meri rutba mera tu hi allah ki nawaji kohinoor hai 
.............................................kamla singh (kamal ) 

जिंदगी

जिंदगी की थकन महसूस होने लगी है 
तल्खियाँ भी जिंदगी की अब खोने लगी है 
आगोश में जाना है एक दिन मौत के सबको 
अब तो(कमल) जिंदगी भी हसींन लगने लगी है।
...................................कमला सिंह 
zindgi ki thakan mehsus hone lagi hai 
talkhiyan bhi jindgi se ab jane lagi hai 
aagosh me jana hai ek din maut ke sabko 
ab tho (kamal)zindgi bhi haseen lagne lagi hai..
..........................................kamla singh 

Wednesday, 12 June 2013

Mausam

मौसम देखो खुशगवार है 
दिल में रोशन सौ चिराग है 
रुत भी देखो बेकरार है 
दिल पे रहा न अब इखित्यार है।
..........................कमला सिंह
 mausam dekho khushgwar hai 
dil me roshan sau chirag hai 
rut bhi dekho bekrara hai 
dil pe raha na ab ikhtiyar hai.
.............................kamla singh 

zindgi

हज़ार रंग हैं जिंदगी के 
कुछ रंगहीन, तो कुछ 
रंगीन है नसीब से, 
मिलता नहीं ये मौसम 
जिंदगी में सबको,
खुशकिस्मत है वो जिसने 
देखा है हर पल को करीब से।

................कमला सिंह  
hazar rang hai zindgi ke 
kuch ranghin ,tho
kuch rangeen hai naseeb se ,
milta nahi ye mausam 
zindgi me sabko 
khushkismat hai vo ,jisne 
dekha hai har palko kareeb se ...
.........................kamla singh 

Tuesday, 11 June 2013

rasme ulfat

ऐ जिंदगी तुझे जीना  चाहती हूँ मैं
लबों से अपने तुझे पीना चाहती हूँ मैं।

तेरे साथ ही चल पड़ें है कदम मेरे 

एक एक लम्हा तुझसे चुराना चाहती हूँ मैं।

पलकों से चूम लूँ तेरा हर वो शय ,

तुझसे ही रस्में उल्फत निभाना चाहती हूँ मैं।

बीते रागिनी को दफ़न कर अतीत के पन्नो में 

तुझसे ही लिपट कर रोना चाहती हूँ मैं।

सीने से लगा ले मुझको तू अपने ,

तमाम उम्र तुझपे अपनी लुटाना चाहती हूँ मैं।।
.................................................कमला सिंह 

ai zindgi tujhko jina chahti hun mai 
labon se apne tujhe pina chahti hu mai

tere sath hi chal pade hai kadam mere 

ek ek lamha tujhse churana chahti hu mai.

palkon se chum lu tera har vo shay 

tujhse hi rasme ulfat nibhana chahti hun mai .

sine se laga le mujhko tu apne,

tamam umra tujhpe litana chahti hun mai...
.................................................kamla singh 


Sunday, 9 June 2013

गिरवी

गिरवी रख आई दिल मेरा उस अजनबी के पास 
अब उसे छुड़ाने की ना हिम्मत रही और न ही रहा आस, 

अपने ख्वाबों और हसरतों के अश्कों  से सींचा था जिसे 
अब उस पर भी मेरा कोई हक नहीं और ना ही जिंदगी रही मेरी खास।।
..................................................कमला सिंह ..

girvi rak aayi dil mera us ajnabi ke pas 
ab usse chudane ki himmat nahi aur na hi raha aas 

apne khwabon aur hasrton ke ashqo se sincha tha jise 
ab us par bhi mera koi haq nahi aur na hi raha vo khas 
..................................................kamla singh ..

Thursday, 6 June 2013

tamam hasraton me se sirf ek dua tho kabul kar mere allah 

meri sari khushiyo ko le kar tu usse meri zindgi me takseem

 kar de 
.......................................................................ks.
हज़ार खुशियाँ भी कुर्बान हैं तेरी दोस्ती की खातिर, 
जिंदगी भी दे दूँ मैं अपनी तेरी जिंदगी की खातिर।।
..............................................कमला सिंह 
 hazar khushiyan bhi kurbaan hai teri dosti ki khatir
zindgi bhi de du mai apni teri zindgi ke khatir ...
.................................................kamla singh 

baarish ki bunden

रिमझिम बरसती बूंदों ने जगा दिया वो बांकपन फिर से 

इठलाती हूँ मैं भी काले बादलों से घिरी घटाओं के जैसे।

मदमस्त है धरती की जवानी भी खुबसूरत फजाओं में

 
कहता है मन मेरा भी,डूब जाऊं इस रुत और हवाओं में। 

झूम लूँ मैं भी,भीगी खुशबु से लिपट कर कुछ पल के लिए ही,


जो मदहोशी में लिए जाती है मुझको अपनी शीतल,रंगीन पनाहों में 


.............................................................कमला सिंह ......

rimjhim barsti bundo ne jaga diya vo bankpan phir se 


madlati ithlaati hu mai kale badlon se ghiri ghatao ke jaise

madmast hai dharti ki javaani bhi fajaon me


kehata hai man mera bhi in rut aur hawaon me

jhum lu mai bhi in bhigi khusbu se liptkarkuch pal ke liye hi

,
jo madhoshi me liye jati hai mujhko apni shital rangeen


 panaaho me..
................................................................kamla singh ....

जुदाई

 पत्ते ज़र्द हो गए जुदा होकर, वृक्छ की शाख से, 
'भभकती लॊ'की रौशनी बुझ सी गयी हो जैसे राख से,
 हम सोचते ही रह गए जिंदगी की अनसुलझी पहेली, 
मैं तनहा क्यों हूँ आज भी इस महफ़िल ऐ साज़ से।
...........................................कमला सिंह 

patte zard ho gaye juda hokar vrich ki shaakh se 
bhabhakti lau ki roshni bujh gayi ho jaise rakh se 
hum sochte reh gaye zindgi ki unsuljhi paheli.
mai tanha kyu hun aaj bhi is mehfil-ai saaz se ....
................................................kamla singh जुदाई 

Wednesday, 5 June 2013


आँखों के रास्ते उतर गए होते दिल में तेरे

गर शीशा ऐ पैमाना ना छलक आया होता

-----------------------------कमला सिंह ---


aankho ke raste uatar gaye hote dil me tere

 
gar seesha ai paimana na chalak aaya hota ....ks
मेरी नज़रें हर बार कुछ कहती हैं तुमसे
 
हर बार चल देते हो अनदेखा कर मुझको।


--------------------कमला सिंह ---

meri nazaren har baar kuch kehti hai tumse 


har baar chal dete ho andekha kar mujhko ..


----------------------ks-----------
दिल की हसरतों को बता के सताया न करो
खो देने का गम सबको देके यूँ जाया न करो
अभी तो शुरू हुआ है इजहारे मोहब्बत का सिलसिला
कुछ कदम पे जाते ही तुम इस कदर घबराया न करो
जिंदगी बड़ी ही अनमोल है, मुश्किल से मिलती है
रुसवाइयों के डर से मोहब्बत को उर्फ्सुदा बनाया न करो
दूर तलक जाना है मंजिल-ए मोहब्बत में तुमको
तनहा छोड़कर मुझको, मंजिल से कतराया न करो
-----------------कमला सिंह ------------

Tuesday, 4 June 2013

khubsurat manzar

खुबसूरत से नज़ारे हैं, 
कुछ बहके से सितारे हैं।

फूलों से लदे ये मंज़र 
लिपटते हैं मुझसे क्यूँकर। 

मद्धम सी हवाएं टकराती हैं मुझसे 
कहती हैं कानों में कुछ चुपके से। 

शायद सारा रुत ही बेक़रार है 
किसी के आहट का इंतज़ार है।

सुकूँ है दिल को जिससे मेरे 
तलाश बरसों की थी मुझको जैसे।

 प्यासे को सावन का जैसे
मिलने को आतुर हूँ  वैसे।


--------------कमला सिंह -----  

Monday, 3 June 2013


दिल मिलना जरुरी है ,रिश्तों को मिलने की खातिर 
जिस्म का मिलना कोई बात नही,रूह की मुलाकात जरुरी है।
------------कमला सिंह -----------

dil milna jaruri hai rishto ko milne ke khatir 
jism ka milna koi baat nahi,rooh ki mulakaat jaruri hai....
----------------ks------------
लोग कहते है की खुद ही एक ग़ज़ल हूँ मैं 
किसी के आँखों का काजल तो ,
किसी के लिए अल्लाह की फज़ल हूँ मैं,
जाफरानी हूँ, किसी के लिए तो ,
किसी के सपनों का महल हूँ मैं 
माहताब हूँ किसी के दिल का 
तो किसी का बीता कल हूँ मैं।
क्या कहूँ खुद को खुद के बारे में,
अल्लाह की बनायी सिर्फ और सिर्फ ,
एक 'पहल' हूँ मैं।। 
--------------------कमला सिंह --------

log klehte hain ki .khud ik gazal hun main 
kisi ki aankhon ka kajal,tho kisi ke 
allah ka fazal hun main,
jafrin hu kisi ke liye tho,
kisi ke sapno ka mehal hun main,
mahtaab hu kisi ke dil ka 
tho kisi ka bitaa kal hu mai ,
kya kahu khud ko khud ke bare me 
allah ki banayi sirf aur sirf ,
ek 'pehal' hu mai ....
-----------------kamla singh ---------